For Freelance Graphic Design, Contact: sanju1984indian@gmail.com

Friday, July 29, 2016

वैशाली

वैशाली जहाँ से सर्वप्रथम प्रजातंत्र शासन प्रणाली का उदय हुआ था। विश्‍व को सर्वप्रथम गणतंत्र का ज्ञान करानेवाला स्‍थान वैशाली ही है। वैशाली का नामाकरण रामायण काल के एक राजा ईक्ष्वाकु वंशीय राजा विशाल के नाम पर हुआ है। वैशाली बिहार राज्य का एक जिला है, जो राज्य की राजधानी पटना से लगभग 45 कि.मी. दूर उत्तर में है। यहाँ पर सम्राट अशोक का अशोक-स्तम्भ है, जिसको भीम की लाठी भी कहा जाता है (देखें: चित्र)। यहाँ सम्राट अशोक का गढ़ भी है। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म इसी जिला में कुंडग्राम नामक स्थान पर हुआ था, जो वैशाली गढ़ से कुछ दूरी पर है। भगवान बुद्ध ने वैशाली के समीप कोल्‍हुआ में अपना अंतिम सम्बोधन दिया था।

वैशाली कि नगरवधु आम्रपाली विश्वप्रसिद्ध राजनर्तकी थी। मगध सम्राट बिंबसार ने आम्रपाली को पाने के लिए वैशाली पर जब आक्रमण किया तब संयोगवश उसकी पहली मुलाकात आम्रपाली से ही हुई। आम्रपाली के रूप-सौंदर्य पर मुग्ध होकर बिंबसार पहली ही नजर में अपना दिल दे बैठे थे। माना जाता है कि आम्रपाली से प्रेरित होकर बिंबसार ने अपने राजदरबार में राजनर्तकी के प्रथा की शुरुआत की थी। बिंबसार को आम्रपाली से एक पुत्र भी हुआ जो बाद में बौद्ध भिक्षु बना।

वैशाली जिला की बात हो और हाजीपुर शहर की चर्चा न हो ऐसा हो हीं नहीं सकता। हाजीपुर के पास से हीं गुजरने वाली गंडक नदी है जिसके एक किनारे हाजीपुर और दूसरे किनारे सोनपुर छोटा शहर बसा हुआ है। जहाँ पर एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला लगता है। यह मेला कार्तिक पूर्णिमा से शुरू होकर एक महीना तक रहता है। जहाँ पर बहुत से विदेशी पर्यटक भी मेला देखने आते हैं। सोनपुर रेलवे मार्ग से भी जुड़ा हुआ है। सोनपुर की रेलवे प्लेटफार्म भारत की तीसरी सबसे बड़ी (लम्बाई में) प्लेटफार्म है।

हाजीपुर से सटा हुआ गंडक नदी के एक किनारे कौनहारा घाट है, जिसके बारे में कहा जाता है, प्राचीन समय में यहाँ गज (हाथी) और ग्राह (मगरमच्छ) में लड़ाई हुई थी। जब हाथी को मगरमच्छ ने घायल करके पानी में डूबोए जा रहा था, तब हाथी ने नदी से कमल का पुष्प तोड़कर, भगवान विष्णु का आराधना किया था और भगवान विष्णु प्रसन्न होकर आए और मगरमच्छ को अपने सुदर्शन चक्र से काटकर हाथी के प्राण की रक्षा की थी। तभी से लोगों द्वारा कहे जाने लगा गज और ग्राह में हुई लड़ाई तो कौन हारा? इसलिए इस घाट को कौनहारा घाट कहते हैं।

इस गंडक नदी के तट पर पैगोडा शैली में निर्मित नेपाली वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना देखा जा सकता है, जिसे नेपाली छावनी कहते हैं। शायद दुनिया का एक मात्र ऐसा शिव मंदिर है, जिसके मुंडेर पे कामसूत्र के आसन खुदे हुए हैं। कहते हैं जब वास्तुकार ने इस पवित्र शिव मंदिर पे कामसूत्र के आसन का नक्काशी करके लगाया था तो अंग्रेज सरकार ने उनके हाथ काट लिये थे, ऐसा लोगों का मानना है।

हाजीपुर में ही रामचौरा नामक एक स्थान है, जहाँ पर भगवान रामचंद्र जी जब विवाह करके वापस जनकपुर (जनकपुर जो अब नेपाल में है) से लौट रहे थे तो उनके पग का निशान है। जो देखने योग्य है। हाजीपुर का केला बहुत ही प्रसिद्ध है।

—संकलन: संजय कुमार



No comments:

Post a Comment