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Wednesday, September 7, 2016

मेरे ग़ज़ल

तेरे प्यार में इस तरह पागल हूँ मैं
कि तेरे नज़रों के तीर का घायल हूँ मैं

इस कदर दीवाने हैं, हम तेरे हुस्न का
इन गोरे-गोरे पैरों का पायल हूँ मैं

तेरी आँखों का नूर, मुझसे ही तो है
जो लगे आँखों में काज़ल हूँ मैं

बहार लाती है फ़ि‍ज़ाओं में जो सावन
वही सावन का बादल हूँ मैं

आजमाँ के तो देख, ऐ मेरे सनम
तेरे इस प्यार के, कायल हूँ मैं

रचनाकारः संजय साह


शब्दार्थ:— नूर (प्रकाश, चमक); फ़ि‍ज़ाओं (वातावरण); कायल (सहमत, यकीन दिलाना)

1 comment:

  1. अतिउत्तम रचना संजय जीl मैं आपकी ऐसी प्रतिभा से पूर्णत: अनजान था.

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