तेरे प्यार में इस
तरह पागल हूँ मैं
कि तेरे नज़रों के
तीर का घायल हूँ मैं
इस कदर दीवाने हैं, हम तेरे हुस्न का
इन गोरे-गोरे पैरों
का पायल हूँ मैं
तेरी आँखों का नूर, मुझसे ही तो है
जो लगे आँखों में
काज़ल हूँ मैं
बहार लाती है फ़िज़ाओं में जो सावन
वही सावन का बादल
हूँ मैं
आजमाँ के तो देख, ऐ मेरे सनम
तेरे इस प्यार के, कायल हूँ मैं
रचनाकारः संजय साह
शब्दार्थ:— नूर (प्रकाश, चमक); फ़िज़ाओं (वातावरण); कायल (सहमत, यकीन दिलाना)

अतिउत्तम रचना संजय जीl मैं आपकी ऐसी प्रतिभा से पूर्णत: अनजान था.
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