महोदय/महोदया
डीडी न्यूज़, दूरदर्शन (राष्ट्रीय
चैनल)
सादर प्रणाम!
मैं संजय कुमार
डीडी न्यूज़ का
नियमित दर्शक हूँ, आापके
द्वारा प्रसारित हर एक
कार्यक्रम देखता हूँ, जो
ज्ञानवर्धक होता है।
दूरदर्शन के राष्ट्रीय
चैनल होने के
नाते यह बहुत
बड़ा दायित्व बन
जाता है कि
कार्यक्रम जो दिखाये
जाते हैं उनके
हिन्दी भाषा सरल,
शुद्ध और उच्च
कोटि का हो।
वैसे, इसमें कोई
दो राय नहीं
है आपके द्वारा
प्रसारित हर कार्यक्रम
की हिन्दी भाषा
उत्कृष्ट हैं जो उच्चरित होते हैं। बस, लिखावट में थोड़ी
त्रुटि नजर आती
है, जो आपसे
बताना मैंने उचित
समझा। आपसे विनम्र
गुजारिश है कि
दिखाये गये कार्यक्रम
में हिन्दी के
कुछ शब्दों में त्रुटियाँ
नज़र आती हैं; जिसपर
आपको ध्यान देना चाहिए।
ध्यान देने योग्य
बातें निम्नलिखित हैं-
आजकल हिन्दी अखबारों में
हिन्दी जो लिखी
जाती है उसे
सभी पढ़ते हैं
लेकिन कभी किसी
ने गौर या
विरोध नहीं किया
कि चंद्रबिन्दु ( ँ
) के जगह अनुस्वार
( ं ) उपयोग क्यों
होता है, जो
नवयुवक को भ्रमित
करती है। मालुम
नहीं ऐसी हिन्दी
लिखने या लिखने
की नयी शैली
अख़बार वालों को कहाँ
से और कैसे
सुझी। ऐसा बिलकुल
भी नहीं है
कि संगणक (कम्प्यूटर)
के कुंजीपटल (कीबोर्ड)
में चंद्रबिन्दु के
लिए कोई कुंजी
नहीं है। मैं
यहाँ हिन्दी में
यह आलेख लिख
रहा हूँ जो
इसका प्रमाण है
कि संगणक के
कुंजीपटल में हर
एक वर्तनी (अक्षर)
के लिए कुंजी
बनाये गये हैं।
जो हिन्दी को
सरल, समृद्ध, सम्पूर्ण
तथा विज्ञानपरक भाषा
बनाता है। मैं
कुछ उदाहरण देकर
समझाना चाहुँगा कि कई
ऐसे शब्द हैं
जो चंद्रबिन्दु के
जगह अनुस्वार का
उपयोग करने से
अर्थ का अनर्थ
हो जाता है।
जैसे- हंस (पक्षी),
हँस (हँसना, क्रिया)
लेकिन अख़बार में
दोनों ही जगह
एक ही जैसा
शब्द (हंस) लिखा
जाता है; जिससे
नवयुवक भ्रमित होंगे और
सोचेंगे कि विद्यालयों
में हंस (पक्षी),
हँस (हँसना, क्रिया)
पढ़ाया जाता है
और अख़बारों में
ऐसे लिखा जाता
है जो गलत
है। अनेकों ऐसे
शब्द हैं जहाँ
चंद्रबिन्दु का उपयोग
बिलकुल भी अख़बार
में नहीं देखने
को मिलता है,
जैसे- गाँव, पाँच,
दाँत, इत्यादि। अगर
सचमुच में शुद्ध
हिन्दी देखना है तो
कुछ ऐसे वेबसाइट
है जहाँ शुद्ध
हिन्दी देखा जा
सकता है, जैसे-
http://bharatdiscovery.org/india/,
http://www.srijangatha.com/, http://kavitakosh.org/kk/ इत्यादि। एक विद्वान के मतानुसार- "दुनिया की कोई
ऐसी भाषा नहीं
है जो सरलता
और अभिव्यक्ति के
दृष्टिकोण से हिन्दी
की तुलना कर
सके।" हिन्दी में
जो बोला जाता
है वही लिखा
जाता है; हर
एक उच्चारण के
लिए एक अक्षर
बनाया गया है
जो वैज्ञानिक पद्धति
पर आधारित है।
मेरा यह
बिल्कुल मतलब नहीं कि दुनिया की
अन्य भाषा को
नहीं सीखनी चाहिए;
सीखें जरूर लेकिन
हिन्दी शुद्ध लिखें, शुद्ध
सीखें और शुद्ध
बोलने का प्रयास
करें। सभी हिन्दी
प्रेमियों और देशवासियों
से मेरा यह
गुजारिश है कि
हिन्दी जो लिखा
जाए, शुद्ध लिखा
जाए न कि
अंग्रेजी की तरह
बोला कुछ जाता
है और लिखा
कुछ जाता है,
जैसे- साइकोलॉजी (Psychology),
केमिस्ट्री (Chemistry), चेप्टर (Chapter),
टु (To),
डु (Do),
गो (Go),
कट (Cut),
बट (But),
पुट (Put)
इत्यादि।
संकलनः संजय साह,
वैशाली, बिहार
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