विकट परिस्थितियों
में बुद्धि का इस्तेमाल
विकट परिस्थितियों
में अपनी बुद्धि को परिस्थिति के अनुकुल साबित करना ही बुद्धिमान की सबसे बड़ी पहचान
होती है। मुगलकाल में अकबर और बीरबल की कहानियाँ तो सबने सुनी होगी। आज हम आपके लिए
लेकर आए हैं एक नयी कहानी...
एक व्यक्ति अपने बीबी,
बच्चों के साथ, कार से कहीं भ्रमण के लिए जा रहे थे। रास्ते में उनके कार का एक पहिया
खुलकर निकल आया और हादसा होते-होते रह गया, जब उन्होंने देखा तो नट-बोल्ट पीछे कहीं
रास्ते में गिर गया था, जो ढूंढना मुमकिन नहीं था। चारों तरफ जंगल थे, दूर-दूर तक कोई
भी नहीं दिखाई दे रहा था। ऐसा लग रहा था दस किलोमीटर आगे-पीछे कोई दुकान, चौक-चौराहा
तक नहीं था। अब ऐसे में पूरा परिवार परेशान था। संयोग ऐसा था कि कार के स्टेपनी को भी
उसने किसी मिस्त्री को पंक्चर बनवाने के लिए दे रखा था। इस तरह पूरे परिवार अपनी विवशता
पर आँसू बहा रहे थे। तभी सड़क किनारे एक पागल उस पूरे परिवार की मुर्खता पर हँसकर बोला,
अरे! पागल, इतनी भी समझ नहीं है तुझे के तीनों चक्के का एक-एक बोल्ट खोलकर चौथे चक्के
में लगाकर जा सके। झट से उसके दिमाग यह बात सुझी और सोंचने लगा यह विचार मेरे मन पहले
क्यों नहीं आये। उसने उस पागल को धन्यवाद कहा और कुछ खाने के लिए पैसे देकर अपने गन्तव्य
को चले गये।
दोस्तों, इस कहानी तात्पर्य है पढ़ा-लिखा होना जरूरी नहीं है बुद्धिमान और समझदार होना ज्यादा जरूरी है; और वह समाज में रहकर, समय और परिस्थितियों से झेलकर ही होती है। ये खुबियाँ बिहार में रहने वाले सभी लोगों में होती है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने आप को साबित करते हैं और हर मुकाम को हासिल करते हैं। आप चाहें रोजमर्रा के जिन्दगी में देख सकते हैं कि बिहारी ट्रेनों में किस तरह सफर करते हैं और ठस्सम-ठस्स भीड़ में भी वो अपने बुद्धि का इस्तेमाल कर घर से आते और जाते हैं जिसका एक उदाहरण इन तस्वीरों में दिखाया गया है।
दोस्तों, इस कहानी तात्पर्य है पढ़ा-लिखा होना जरूरी नहीं है बुद्धिमान और समझदार होना ज्यादा जरूरी है; और वह समाज में रहकर, समय और परिस्थितियों से झेलकर ही होती है। ये खुबियाँ बिहार में रहने वाले सभी लोगों में होती है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने आप को साबित करते हैं और हर मुकाम को हासिल करते हैं। आप चाहें रोजमर्रा के जिन्दगी में देख सकते हैं कि बिहारी ट्रेनों में किस तरह सफर करते हैं और ठस्सम-ठस्स भीड़ में भी वो अपने बुद्धि का इस्तेमाल कर घर से आते और जाते हैं जिसका एक उदाहरण इन तस्वीरों में दिखाया गया है।
धन्यवाद!
संकलनः संजय साह

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