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Sunday, October 16, 2016

बसों व ट्रकों में लगे कानफाड़ू हॉर्न बजाने के विरोध में परिवहन मंत्री बिहार से एक विनम्र गुजारिश

बसों व ट्रकों में लगे हॉर्न इतना तेज, कानफाड़ू होते हैं कि दिल के मरीजों से लेकर आमजन तक का जीना हराम हो गया है, कम-से-कम उन विद्यालयों का तो ख्याल रखना चाहिए जो सड़क किनारे बने हैं जिसमें हमारे बच्चे पढ़ रहे हैं। इन बच्चों की पढ़ाई कैसी होगी यह सोंचकर हैरानी होती है। फिर भी बिहार के परिवहन विभाग मंत्री इस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं करते, मालूम नहीं। मैं बात कर रहा हूँ उन तमाम बिहार के राष्ट्रीय व राज्यीय राजमार्गों पर चलने वाली डिलक्स सेवा वाली बसों तथा ट्रकों की जो बिना रूके लगातार हॉर्न इतने तेज आवाज़ में बजाते हैं कि लगता है दिमाग फट जाएगा। ये कैसा बिहार है? जहाँ पर कोई सुव्यवस्थित कानून-व्यवस्था नहीं है। नेता लोग सिर्फ लुभावने वादे, भाषण व राजनीति में लगे रहते हैं और इस तरह की समस्याओं पर किसी का ध्यान क्यों नहीं जाता? समस्याओं की गिनती कराएँ तो हजारों ऐसे समस्याएँ हैं जिनसे बिहार में रोज ही दो-चार होना पड़ता है, जिसमें से एक भोजपूरी के अश्लील गानों का तेज आवाज़ में लाउड-स्पीकर बजाना भी है। मनुष्य को अभिव्यक्ति की आजादी है, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि किसी दूसरे या सार्वजनिक को कोई नुकसान पहुँचाया जाए। जहाँ तक कानून की बात करें तो इसके लिए कानून बने हुए हैं जिसके तहत सजा का प्रावधान है लेकिन फिर भी वाहन वाले बेफ्रिकी से अबतक वाहन चलाते आये हैं और कोई कानून-व्यवस्था इस पर आजतक ध्यान नहीं दिया। मैं जब भी अपने गाँव सप्ताह भर के लिए जाता हूँ, घर पर चैन की नींद लेना दुश्वार हो जाता है, क्योंकि मेरा घर बिल्कुल ही राज्यीय राजमार्ग संख्या - 49 के किनारे अवस्थित है।

कुछ ही साल पहले एक अधिकारी इसी राज्यीय राजमार्ग संख्या - 49 से गुजर रहे थे, उन्हें रास्ते में कुछ ठोकरें मिलीं जो गाँव-देहात के सड़कों पर अक्सर मिल जाते हैं तो उन्होंने आदेश देकर सारे ठोकरें बुल्डोजर से तोड़वाकर रास्ते को समतल बनवा दिया ताकि गाड़ियों को दौड़ाने में कोई रूकावट न आए। क्या? कोई अधिकारी को ही कोई तकलीफ हो तभी कोई कानून-व्यवस्था में सुधार या परिवर्तन कराया जा सकता है, और आम जनता चाहे जैसे भी रहे कोई मतलब नहीं? यह तो वही बात हो गयी कि “बस्ती के कत्लेआम पे निकली न आह, खुद को लगी चोट तो दरिया बहा गये...”

अतः परिवहन मंत्री माननीय श्री चंद्रिका बाबू से मेरी विनम्र प्रार्थना है कि इस समस्या को ध्यान में रखकर कानफाड़ू हॉर्न तथा अश्लील गानों के प्रति उचित कार्रवाई करें। जिससे यह साबित हो सके कि बिहार में सचमुच में सुशासन व्यवस्था है, जिसका डंका हमारे सुशासन बाबू नीतीश कुमार जी तथा उनके पार्टी के सदस्य पीटते रहते हैं।


एक आम नागरिक
संजय साह
वैशाली, बिहार

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