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Thursday, January 7, 2016

कविताएँ

जब चाँद सँवरकर बाम-ए-फलक पर, मह-ए-तबस्सुम होता है।
जब होठों पर जलपरियों के हल्का-सा तरन्नुम होता है।
जब रात सुनाया करती है, रंगीन सितारों के नग्मे,
तो मैं पहरों सोंचा करता हूँ, क्या इसको मोहब्बत कहते हैं।













शब्दार्थ:— बाम-ए-फलक (आसमान का छत); मह-ए-तबस्सुम (चाँद-सा मुस्कान); तरन्नुम (मधुर संगीत)

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