जब चाँद सँवरकर बाम-ए-फलक पर, मह-ए-तबस्सुम होता है।
जब होठों पर जलपरियों के हल्का-सा तरन्नुम होता है।
जब रात सुनाया करती है, रंगीन सितारों के नग्मे,
तो मैं पहरों सोंचा करता हूँ, क्या इसको मोहब्बत कहते हैं।
शब्दार्थ:— बाम-ए-फलक (आसमान का छत); मह-ए-तबस्सुम (चाँद-सा मुस्कान); तरन्नुम (मधुर संगीत)
जब होठों पर जलपरियों के हल्का-सा तरन्नुम होता है।
जब रात सुनाया करती है, रंगीन सितारों के नग्मे,
तो मैं पहरों सोंचा करता हूँ, क्या इसको मोहब्बत कहते हैं।
शब्दार्थ:— बाम-ए-फलक (आसमान का छत); मह-ए-तबस्सुम (चाँद-सा मुस्कान); तरन्नुम (मधुर संगीत)
No comments:
Post a Comment